सरल तर्पण विधि SARAL TRPAN
सरल तर्पण
बायें हाथ और दाहिने हाथ की अनामिका अंगुलियों में कुशा निर्मित पवित्री (पैंती) धारण करें। यज्ञोपवीत जनेऊ को सव्य (सीधा)कर लें। तीन कुशाओं को लेकर बाँधकर ग्रन्थी लगाकर कुशाओं का अग्रभाग पूर्व में रखते हुये दाहिने हाथ में द्रव्य, जौ, जल, और अक्षत लेकर संकल्प पढ़ें।
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः। हरि: ॐ तत्सदद्यैतस्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे संवत्सर का नाम (----) अमुकसंवत्सरे (----) तमे ----अमुकमासे, ----अमुकपक्षे, ----अमुकतिथौ, ----अमुकवासरे -------------अमुकगोत्रोत्पन्न: अमुक( ----)शर्मा (वर्मा, गुप्त:) अहं श्रुति-स्मृति-पुराणोक्त-फलप्राप्त्यर्थं पितृतर्पण- महम् करिष्ये।
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तदनन्तर एक बड़ा तांबे का बर्तन अथवा एक बड़ा पीतल का बर्तन में या किसी अन्य पात्र में जो मिट्टी अथवा लोहे का न हो फिर उस पात्र के ऊपर एक हाथ या प्रादेश मात्र लम्बे तीन कुश रखें जिनका अग्रभाग पूर्व की ओर रहे। इसके बाद दूसरे अन्य पात्र में तर्पण के लिए जल भर दें। फिर उसमें रखे हुये तीनों कुशों को सम्पुटाकार दायें हाथ में लेकर बायें हाथ से ढक लें और निम्नाङि्कत मंत्र पढ़ते हुए देवताओं का आवाहन करें।👇
देवतादि आवाह्नम्
ब्रह्मादय: सुरा: सर्वे ऋषय: सनकादय:।
आगच्छन्तु महामाया ब्रह्माण्डोदरवर्तिन:।।
कुशों द्वारा दायें हाथ की समस्त अङ्गुलियों के अग्रभाग अर्थात् देवतीर्थ से ब्रह्मादि देवताओं के लिए पूर्वोक्त पात्र में से एक-एक अञ्जलि चावल मिश्रित जलपूरित पात्र से लेकर दूसरे पात्र में गिरावें और निम्नाङि्कत रूप से उन-उन देवताओं के नाम मन्त्र पढ़ते रहें -
देवतर्पण
ॐब्रह्मा तृप्यताम्।
ॐ विष्णुस्तृप्यताम्।
ॐ रुद्रस्तृप्यताम्।
ॐप्रजापतिस्तृप्यताम्।
ॐ देवास्तृप्यन्ताम्
ॐ छन्दांसि तृप्यन्ताम्।
ॐवेदास्तृप्यन्ताम्।
ॐ ऋषयस्तृप्यन्ताम्।
ॐपुराणाचार्यास्तृप्यन्ताम्।
ॐ गन्धर्वास्तृप्यन्ताम्।
ॐ इतराचार्यास्तृप्यन्ताम्।
ॐ संवत्सरः सावयवस्तृप्यताम्।
ॐ देव्यस्तृप्यन्ताम्।
ॐ अप्सरसस्तृप्यन्ताम्।
ॐदेवानुगास्तृप्यन्ताम्।
ॐ नागास्तृप्यन्ताम्
ॐ सागरास्तृप्यन्ताम
ॐ पर्वतास्तृप्यन्ताम्।
ॐ सरितस्तृप्यन्ताम्।
ॐ मनुष्यास्तृप्यन्ताम्।
ॐ यक्षास्तृप्यन्ताम्।
ॐ रक्षांसि तृप्यन्ताम्।
ॐ पिशाचास्तृप्यन्ताम्।
ॐ सुपर्णास्तृप्यन्ताम्।
ॐ भूतानि तृप्यन्ताम्।
ॐ पशवस्तृप्यन्ताम्।
ॐ वनस्पतयस्तृप्यन्ताम्।
ॐ ओषधयस्तृप्यन्ताम्।ᅠᅠ
ॐभूत-ग्रामश् चतुर-विध स्तृप्यताम्।
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ऋषितर्पण-निम्नाङि्कत मन्त्रों द्वारा ऋषि नाम मन्त्र से मरीचि आदि ऋषियों को भी एक-एक अञ्जलि जल दें-
ॐ मरीचिस्तृप्यताम्।
ॐ अत्रिास्तृप्यताम्।
ॐ अङि्गरास्तृप्यताम्।
ॐ पुलस्त्यस्तृप्यताम्।
ॐ पुलहस्तृप्यताम्।
ॐ क्रतुस्तृप्यताम्।
ॐ वसिष्ठस्तृप्यताम्।
ॐ प्रचेतास्तृप्यताम्।
ॐ भृगुस्तृप्यताम्।
ॐ नारदस्तृप्यताम्॥
प्रजापति तीर्थ से तर्पण करें जनेऊ को गले में कंठी की तरह कर लें
ॐ सनकस्तृप्यताम्॥2।।
ॐ सनन्दनस्तृप्यताम्॥2॥
ॐ सनातनस्तृप्यताम्॥2॥
ॐ कपिलस्तृप्यताम्॥2॥
ॐ आसुरिस्तृप्यताम्॥2॥
ॐ वोढुस्तृप्यताम्॥2॥
ॐ पञ्चशिखस्तृप्यताम्॥2॥
अपसव्य जनेऊ और अंगोछा दाहिने कन्धे पर धारण कर दक्षिण दिशा को मुॅंह करके घुटना जमीन पर टिकायें । पितृ तीर्थ से निम्न मंत्रों की तीन-तीन अंजलि जल दें
ॐ यमाय नम :॥3॥
ॐ धर्मराजाय नम :॥3॥
ॐ मृत्युवे नमः॥3॥
ॐ अन्तकाय नम :॥3॥
ॐ वैवस्वताय नम :॥3॥
ॐ कालाय नमः॥3॥
ॐ सर्वभूतक्षयाय नम :॥3॥
ॐ औदुम्बराय नम :॥3॥
ॐ दध्नाय नमः॥3॥
ॐ नीलाय नम :॥3॥
ॐ परमेष्ठिने नम :॥3॥
ॐ वृकोदराय नम :॥3॥
ॐ चित्रााय नम :॥3॥
ॐ चित्रागुप्ताय नम :॥3॥
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्तु जल अंजलिम्
-------अमुकगोत्राः अस्मत्पिता (बाप) अमुकशवसुरूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं (गङ्गा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः॥3॥
-------अमुकगोत्राः अस्मत्पितामहः (दादा) अमुकशर्मा रुद्ररूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नमः॥3॥
-------अमुकगोत्राः अस्मत्प्रपितामहः (परदादा) अमुकशर्मा आदित्यरूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नमः॥3॥
-------अमुकगोत्रा अस्मन्माता अमुकी देवी वसुरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥3॥
-------अमुकगोत्रा अस्मत्पितामही (दादी) अमुकी देवी रुद्ररूपा तृप्यताम् इदं सतिलं तलं तस्यै स्वधा नमः॥3॥
-------अमुकगोत्रा अस्मत्प्रपितामही (परदादी) अमुकी देवी आदित्यरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥3॥
-------अमुकगोत्रा अस्मत्सापत्नमाता (सौतेली मां) अमुकी देवी वसुरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥2॥
द्वितीय (नाना के ) गोत्र का तर्पण-
इसके बाद द्वितीय गोत्र मातामह आदि का तर्पण करे,
-----अमुकगोत्राः अस्मन्मातामहः (नाना) अमुकशर्मा वसुरूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नमः॥3॥
-----अमुकगोत्राः अस्मत्प्रमातामहः (परनाना) अमुकशर्मा रुद्ररूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥3॥
------अमुकगोत्राः अस्मद्वृद्धप्रमातामहः (बूढ़े परनाना) अमुकशर्मा आदित्यरूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥3॥
-------अमुकगोत्रा अस्मन्मातामही (नानी) अमुकी देवी वसुरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥3॥
--------अमुकगोत्रा अस्मत्प्रमातामही (परनानी) अमुकी देवी रुद्ररूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥3॥
-----अमुकगोत्रा अस्मद्वृद्धप्रमातामही (बूढ़ी परनानी) अमुकी देवी आदित्यरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥3॥
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जिस योनि में भी पितर गये हों उनको उसी रूप में भी प्राप्ति हेतु जल दें
असुर, यक्ष, नागा, गन्धर्व, पिशाच, प्रेत सिद्ध कूष्माण्डा: तरवः खगाः
जलेचरा भूनिलया वायुस्थित जलजन्तवः । तेभ्यो स्वधा नमः
नरक यातना स्थितेभ्यो स्वधा नमः
अबान्धव बान्धव तेभ्यो स्वधा नमः
अन्यजन्मनि बान्धवा: तेभ्यो स्वधा नमः
ज्ञात-अज्ञात सर्वेभ्यो तेभ्यो स्वधा नमः
वस्त्र निष्पीडनम् (धुले हुए कपड़े को जल में भिगोकर नहीं निड़ना) के द्वारा-
अपुत्रा गोत्रिाणो मृता गृह्णन्तु वस्त्रानिष्पीडनोदकम् तेभ्यो स्वधा नमः
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गंगापुत्र भीष्म तर्पण
वैयाघ्रपद-गोत्राय साङ्कृति-प्रवराय
गङ्गापुत्राय भीष्माय वर्मणे तस्यै स्वधा नमः(३)
सूर्य अर्घ्य
नमो विवस्वते ब्रह्मन्! भास्वते विष्णुतेजसे।
जगत्सवित्रे शुचये सवित्रे कर्मदायिने।।
इसके पश्चात् दिग्देवताओं को पूर्वादि क्रम से नमस्कार करे -
'ॐप्राच्यै (पूर्वायै)नमः ॐ इन्द्राय नमः' ।
आग्नेय्यै नमः ॐ अग्नये नमः'।
ॐदक्षिणायै नमः ॐयमाय नमः'
ॐनैर्ऋत्यै नम: ॐनिर्ऋतये नमः' ।
ॐ प्रतीच्यै(पश्चिमायै) नमः ॐ वरुणाय नमः'
ॐवायव्यै नमः ॐ वायवे नमः'
ॐउदीच्यै नमः ॐ कुबेराय नमः'
ॐ ऐशान्यै नमः ॐ ईशानाय नमः'
ॐऊर्ध्वायै नमः ॐ ब्रह्मणे नमः'
ॐ अधरायै ॐ अनन्ताय नमः'
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इसके बाद जल में नमस्कार करें -👇
ॐ ब्रह्मणे नमः।
ॐ अग्नये नमः।
ॐ पृथिव्यै नमः।
ॐ ओषधिभ्यो नमः।
ॐ वाचे नमः।
ॐ वाचस्पतये नमः।
ॐ महद्भ्यो नमः।
ॐ विष्णवे नमः।
ॐ अद्भ्यो नमः।
ॐ अपाम्पयते नमः।
ॐ वरुणाय नमः॥
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पितृ स्वरूपीं जनार्दन-भगवान-वासुदेव तर्पण
अनेन यथा-शक्ति-कृतेन देवर्षि-मनुष्यपितृ-तर्पणाख्येन कर्मणा भगवान् पितृस्वरूपी जनार्दनवासुदेवः प्रीयतां न मम।
यत्पादपङ्कजस्मरणात् यस्य नामजपादपि ।।
न्यूनं कर्म भवेत् पूर्णं तं वन्दे साम्बमीश्वरम्।।
सम्पूर्णतां याति सद्यो वन्दे तमच्युतम्।।
ॐ विष्णवे नमः। ॐ विष्णवे नमः। ॐ विष्णवे नमः।
ॐ शिवाय नमः। ॐ शिवाय नमः। ॐ शिवाय नमः।
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तर्पण विधि समाप्ता
9555869444, 9210103470



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