आरती गोवर्धनधारी नई रचना Aarti Govardhandhari new

 


आरती की रचना सतीश कुमार शास्त्री जी द्वारा 



गिरिराज जी की आरती

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नारायण गिरिराज आरती गोवर्धन धारी।

नन्द यशोमति बाल वाली गिरि गोवर्धन धारी।।

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श्री नन्द लाल यशोदा ने नन्दन,

गोपी ग्वाल कर जोरे वन्दन।

छे दिन को जब भयो,

पूतना प्रयाण पिये मारी।।


नारायण गिरिराज आरती गोवर्धन धारी ०----------

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तीन महीने को भयो लाला,

झकड़ा उलट दियो गोपाला, 


लाला एक बर्ष को  भयो , तृणावर्त प्रमाणन को हारी।

नारायण गिरिराज आरती गोवर्धन धारी ०----------

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वत्स अघासुर और बकासुर, 

पांच बरष अधर मुरली सुर।


छठे बरष कालिया फन पे,

नृत्य चमत्कारी।।

नारायण गिरिराज आरती गोवर्धन धारी ०----------

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सुरपति पूजन बन्द करायो,

गिरि गोवर्धन को पुजवायो।


सात बरस को भयो,

इन्द्र को मान दलनकारी।।

नारायण गिरिराज आरती गोवर्धन धारी ०----------

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ब्रज गोपिन संग रास रचायो,

शिव ने गोपी रूप बनायो।

लाला एकादश को भयो,

कंस को प्राण दण्डकारी।।

नारायण गिरिराज आरती गोवर्धन धारी ०----------

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