भगवान श्री परशुराम जी की चरणों की वन्दना स्वरचित

  आचार्य सतीश कुमार शास्त्री



हम सभी के द्वारा भगवान परशुराम जी के चरणों में प्रणाम

नमामि  भृगुपतिपदारविन्दंप्र
पन्न-तापो-पश-मात-पत्रम्।
व्रजेम सर्वे शरणं य जयदीश
स्मृतं प्रयच्छत्य-भयं स्वपुंसाम्।। 

हम सब भृगुपति (श्रीपरशुराम) भगवान् जी के चरण कमलों की वंदना करते हैं

जो अपनी शरण में आये हुये

जीवो का ताप दूर करने के लिए छत्र के समान हैं अतः हम सब उनके चरण कमलों की शरण लेते हैं जो अपना स्मरण करने वाले भक्तों को अभय कर देते हैं




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